RBI ने एक झटके में 4 बैंकों पर लगाया प्रतिबंध

  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चार सहकारी बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। इसमें ग्राहकों के अपने बैंक खातों से पैसा निकालने की सीमा लगाना शामिल है। आरबीआई के मुताबिक साईबाबा जनता सहकारी बैंक, द सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सूरी (पश्चिम बंगाल) और बहराइच के नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया गया है।


कितनी है लिमिट: आदेश के मुताबिक, साईबाबा जनता सहकारी बैंक के जमाकर्ता 20,000 रुपये से अधिक नहीं निकाल सकते है। जबकि सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है। इसी तरह, नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के मामले में निकासी की सीमा प्रति ग्राहक 10,000 रुपये कर दी गई है। आरबीआई ने बिजनौर स्थित यूनाइटेड इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर भी कई प्रतिबंध समेत ग्राहकों द्वारा धन निकासी पर रोक लगा दी है।

क्या है वजह: केंद्रीय बैंक द्वारा चार सहकारी बैंकों को यह निर्देश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत जारी किये गए है, जो छह महीने तक लागू रहेंगे। इन बैंकों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

मुख्यमंत्री चौहान ने सीबीएसई 10वीं कक्षा की परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दी बधाई

  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा आज जारी 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में उत्तीर्ण होने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्‍वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सभी छात्र-छात्राएँ आगे भी इसी तरह मेहनत करें और सफलता की ऊँचाइयाँ प्राप्त करें। मुख्यमंत्री चौहान ने उत्तीर्ण होने वाले सभी विद्यार्थियों के अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि आपके आशीर्वाद और कठिन परिश्रम का यह सुपरिणाम है।


मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जो छात्र-छात्राएँ परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं कर पाए हैं, वे निराश न हों। पुन: नए जोश और उत्साह के साथ परिश्रम कर भावी परीक्षा की तैयारी करें, सफलता अवश्य मिलेगी।

शनिवार के दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये काम

  शनिवार का दिन विधि- विधान से हनुमान जी की पूजा- अर्चना करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हनुमान जी की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हनुमान जी इस कलयुग में जागृत देव हैं और अजर- अमर हैं। हनुमान जी को प्रसन्र करना काफी आसान होता है।


घी की ज्योत जलाएं

  • घर के मंदिर में घी की ज्योत प्रज्वलित करें। घी की ज्योत जलाने के बाद हनुमान जी का आवाहन  करें और अधिक से अधिक ध्यान करें।

हनुमान चालीसा का पाठ करें

  • हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। आज एक से अधिक बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

हनुमान जी को भोग लगाएं

  • आज हनुमान जी को भोग अवश्य लगाएं। आप अपनी इच्छानुसार कुछ भी भोग लगा सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है। 
  • राम नाम का संकीर्तन करें

    • हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय है भगवान श्री राम के नाम का संकीर्तन। ऐसा माना जाता है जहां राम नाम का संकीर्तन होता है वहीं हनुमान जी का वास होता है। हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए राम नाम का संकीर्तन जरूर करें।

सुष्मिता सेन की कार में दिखा कुछ ऐसा

  बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन तब से ही सुर्खियों में है जब से उनके रिलेशनशिप की खबरें आई हैं। आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी ने उनके और सुष्मिता सेन के रिश्ते को जगजाहिर किया था। उन्होंने मालदीव की छुट्टियों की कुछ तस्वीरें शेयर की थी जिसमें वे और सुष्मिता काफी करीब नजर आ रहे थे। सुष्मिता के इस रिश्ते को लेकर लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया। सोशल मीडिया पर हर जगह आजकल सुष्मिता सेन ही छाई रहती है। ऐसा लगता है कि यूजर्स उन्हें बस ट्रोल करने का मौका ही ढूँढ रहे हैं। एक्ट्रेस जैसे ही सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करती है वैसे ही वह वायरल हो जाता है। हाल ही में सुष्मिता ने अपनी एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। लोगों ने सुष्मिता की इस फोटो में भी कुछ ऐसा ढूंढ लिया जिसे एक नजर में देख पाना मुश्किल होता। इसके बाद से ही लोगों ने एक्ट्रेस को ट्रोल करना शुरू कर दिया।


सुष्मिता ने जो अपनी फोटो शेयर की है उसमें वे अपनी कार में बैठी हुई नजर आ रही हैं। वे सेल्फी क्लिक करते हुए स्माइल कर रही हैं। एक्ट्रेस ने अपने लुक में ब्लू कलर का स्लीवलेस टॉप पहन रखा है। साथ ही उन्होंने ब्लैक चश्मा भी लगा रखा है। एक्ट्रेस की इस फोटो में लोगों ने कुछ ऐसा देख लिया जिससे अब वे उन्हें काफी ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल सुष्मिता के चश्में में दो बोतलें नजर आ रही हैं। उन बोतलों की हल्की झलक ही दिखाई दे रही है। अब इसे लेकर लोग उनसे तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। कोई एक्ट्रेस से पूछ रहा है कि 'ये वोडका है क्या।' वहीं कई लोग व्हिस्की को लेकर सवाल कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री करेंगे विभागीय समीक्षा

 पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब शिवराज सरकार मिशन 2023 की तैयारियों में जुटेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 15 अगस्त के बाद विभागीय समीक्षा की शुरुआत करेंगे। इसके लिए सभी विभागों से हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी मांगी गई है। साथ ही सितंबर 2023 तक पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि के शिलान्यास और लोकार्पण योग्य कामों की सूची भी मांगी गई है। समीक्षा में मंत्रियों के साथ विभागीय अधिकारी उपास्थित रहेंगे।


प्रदेश में नवंबर-दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आचार संहिता प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने अपने स्तर पर विधानसभा चुनाव की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री 15 अगस्त के बाद विभागीय समीक्षा करेंगे।

इसमें आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की कार्ययोजना की पूर्ति की स्थिति, हितग्राहीमूलक योजनाओं की प्रगति, लोक सेवा गारंटी कानून के अंतर्गत लाई जाने वाली सेवाओं में वृद्धि के प्रस्ताव, निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे कार्य और अधोसंरचना विकास के कामों की समीक्षा की जाएगी। विभागों से सितंबर 2023 तक पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत के शिलान्यास और लोकार्पण योग्य कामों की सूची मांगी गई है ताकि कार्यक्रम तय किए जा सकें ।

मुख्यमंत्री जल्द ही रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा भी करेंगे। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के साथ शहरी और ग्रामीण पथ विक्रेता योजना के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शासकीय विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी इसी वर्ष प्रारंभ हो जाएगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। इसके आधार पर भर्ती के कार्यक्रम तय किए जाएंगे।

हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर हॉन्गकॉन्ग में ED ने जब्त की 253 करोड़ की संपत्ति

  बैंकों से धोखाधड़ी कर भागे हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा ऐक्शन लिया है। एजेंसी ने हॉन्गकॉन्ग में नीरव मोदी की 253.62 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस पंत्ति में हीरे, ज्वेलरी और बैंक में जमा रकम शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि अब तक नीरव मोदी की ओर से धोखाधड़ी के मामले में 2650.07 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। फिलहाल पंजाब नेशनल बैंक समेत कई वित्तीय संस्थाओं के साथ धोखाधड़ी करने वाला नीरव मोदी ब्रिटेन में रह रहा है। उसके प्रत्यर्पण के लिए भी सरकार की ओर से प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।


जून के आखिरी सप्ताह में ही उनके प्रत्यर्पण के मामले में एक और आपत्ति दायर की है। इस मामले में अब अदालत ने अक्टूबर में सुनवाई का फैसला लिया है। इससे साफ है कि नीरव मोदी का प्रत्यर्पण का मामला और जटिल हो गया है। नीरव मोदी के वकील ने अदालत में कहा कि यदि उसका प्रत्यपर्पण किया जाता है तो वह आत्महत्या कर सकते हैं। ऐसे में उनका प्रत्यर्पण करना गलत होगा।

यही नहीं नीरव मोदी का कहना है कि उसे भारत की जेलों में बेहद खराब स्थिति में रहना होगा। इस बीच ईडी की इस कार्रवाई ने नीरव मोदी पर थोड़ा शिकंजा जरूर कसा है। गौरतलब है कि शराब कारोबारी विजय माल्या, हीरा कोराबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के देश से धोखाधड़ी कर भागने के मामले में अकसर सरकार विपक्ष के हमलों का भी सामना करती रही है।

पश्चिम बंगाल में मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता चटर्जी के घर से ईडी की छापेमारी में मिला 20 करोड़ कैश

  पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। जानकारी के मुताबिक यह छापेमारी पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड भर्ती घोटाले के संबंध में की जा रही है। इस दौरान बंगाल सरकार मंत्री पार्थ चटर्जी के विभिन्न ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ कैश बरामद किया गया है।


पैसे गिनने में लगे बैंक कर्मचारी
ईडी को यह रकम अर्पिता के आवासीय अहाते से मिली है। छापा मारने पहुंची टीम इस रकम को गिनने के लिए बैंक कर्मचारियों और काउंटिंग मशीन की मदद ले रही है। इसके अलावा अर्पिता के घर से 20 मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। अधिकारी यह जानकारी निकालने में जुटे हैं कि आखिर इतने ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल होता किसलिए था? फोटो में दिखाई दे रहा है कि बड़ी संख्या में 500 और 2000 के नोट कमरे में रखे हुए हैं।

इन पर भी छापेमारी
इसके अलावा ईडी के कर्मचारी इस मामले में शिक्षा राज्यमंत्री परेश अधिकारी के कूच बिहार जिला स्थित घर की भी तलाशी ले रहे हैं। पार्थ चटर्जी और परेश अधिकारी से सीबीआई एसएससी भर्ती घोटाले में पूछताछ कर चुकी है। बयान में कहा गया कि ईडी ने  विधायक माणिक भट्टाचार्य और अन्य के परिसरों पर भी छापा मारा है।

कहां गई वीराना की मिस्ट्री गर्ल जैस्मिन जो इस शर्त पर सारे कपड़े उतारने को तैयार थी...

 दो गज जमीन के नीचे, 20 साल बाद और वीराना ऐसी हॉरर फिल्में हैं जो 80-90 के दशक के सिनेमाप्रेमियों को अच्छी तरह याद होंगी। फिल्म के भूत जहां लोगों को डराते हैं वहीं रामसे ब्रदर्स की मूवी वीराना की हिरोइन जैस्मिन अपनी खूबसूरती के लिए चर्चा में थी। फिल्म में जैस्मिन की बोल्डनेस भी काफी सुर्खियों में रही। वीराना में जैस्मिन का रोल प्ले करने वाली ऐक्ट्रेस का असली नाम जैस्मिन धुन्ना था। फिल्म में जैस्मिन पर बुरी आत्मा का साया था जो खूबसूरत लड़की का रूप लेकर मर्दों को रिझाती थी। वीराना के बाद जैस्मिन रातोरात सुर्खियों में आ गईं लेकिन यह मूवी उनकी आखिरी हिट फिल्म बनकर रह गई। वह फिल्म इंडस्ट्री से इस तरह गायब हुईं कि एक रहस्य बन गईं। 


वीराना की वो हसीन चुड़ैल

जिसे भी वीराना याद आती है सबसे पहले जेहन में सवाल आता है कि जैस्मिन अब कहां हैं। फिल्म में जैस्मिन ने काफी बोल्ड सीन दिए थे। वह इससे ज्यादा बोल्ड सीन्स देने के लिए तैयार थीं। उन्हें फिल्म के लिए कपड़े उतारने या किसिंग सीन से कोई परहेज नहीं था। 1987 में एक इंटरव्यू के दौरान जैस्मिन ने कहा था, अगर लीड हीरो मुझे एक्साइट कर लेता है तो कैमरे के सामने अंग प्रदर्शन में कोई गुरेज नहीं, मुझे किस करने में भी कोई दिक्कत नहीं है। अगर राज कपूर जैसा डायरेक्टर मिले तो मैं अपने कपड़े भी उतार सकती हूं।

13 साल में किया था डेब्यू

वीराना जैस्मिन की पहली फिल्म नहीं थी। 1979 में फिल्म सरकारी मेहमान से उन्होंने डेब्यू किया था। फिल्म में उनके हीरो विनोद खन्ना था। उस वक्त जैस्मिन की उम्र 13 साल थी। फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद जैस्मिन मॉडलिंग करने लगीं। इसके बाद 1988 में उन्होंने फिल्म वीराना से वापसी की और दर्शकों के दिलोदिमाग पर छा गईं। 

एशिया कप 2022 को लेकर बड़ा ऐलान

 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि एशिया कप 2022 का आयोजन कहां होगा। सौरव गांगुली ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें भारत को भी मेजबान बताया जा रहा है। गांगुली ने बताया है कि एशिया कप का आयोजन अब संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में होगा। बीसीसीआई बॉस ने इसका कारण भी बताया है।  


गुरुवार 21 जुलाई को बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल की मीटिंग के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि टी20 प्रारूप में होने वाले एशिया कप 2022 का आयोजन यूएई में इस कारण से भी होगा, क्योंकि वहां अगस्त-सितंबर में बारिश नहीं होगी। उन्होंने कहा, "एशिया कप का आयोजन यूएई में किया जाएगा, क्योंकि इस मौसम में यही एक जगह है, जहां पर बारिश नहीं होगी।"  

एशिया कप 2022 का आगाज 27 अगस्त से होना है। हालांकि, ये टूर्नामेंट श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में ही खेला जाएगा। श्रीलंका में चल रहे मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच श्रीलंका क्रिकेट ने खुद ही इस टूर्नामेंट को अपने यहां नहीं आयोजित करने की बात कही थी। टूर्नामेंट का आयोजन आस्ट्रेलिया में होने वाले आइसीसी टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए इसी फार्मेट में खेले जाने पर फैसला लिया गया है।  

द्रौपदी मुर्मू के चुनाव जीतते ही बने ये पांच रिकॉर्ड

 15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है। 


15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है। 

सबसे युवा राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को हुआ था। 25 जुलाई को उनकी उम्र 64 साल 1 महीना और 8 दिन होगी। द्रौपदी मुर्मू अब तक की सबसे युवा राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के नाम था। जब वह राष्ट्रपति बने तो उनकी उम्र 64 साल दो महीने और 6 दिन थी। वह निर्विरोध राष्ट्रपति बने थे। वहीं सबसे ज्यादा उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले में के आर नारायणन का नाम दर्ज है। वह 77 साल 5 महीने 21 दिन की उम्र में राष्ट्रपति बने थे। 

ब्रिटिश पीएम रेस के फाइनल में पहुंचे ऋषि सुनक

  ब्रिटेन के नए पीएम बनने के लिए भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। कंजर्वेटिव सांसदों की ओर से की गई पांचवें दौर के मतदान में ऋषि सुनक फिर अव्वल रहे। सुनक को 137 वोट मिले। अब उनका मुकाबला आखिरी चरण के लिए लिज ट्रस से होगा। पांच दौर के मतदान में अव्वल रहे ऋषि सुनक की राह जितनी आसान दिख रही है, उतनी है नहीं। विपक्षी पार्टी और खुद बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को अगले पीएम के पद पर नहीं देखना चाहते हैं। 


भारतीय मूल के सांसद ऋषि सुनक और विदेश सचिव लिज ट्रस यूके के नए पीएम पद के शीर्ष दो दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। सुनक को अंतिम चरण के मतदान में 137 मत मिले। जबकि लिज ट्रस ने बोरिस जॉनसन को ब्रिटिश प्रधान मंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नए नेता की दौड़ में 113 वोट हासिल किए। पूर्व विदेश मंत्री सुनक ने कंजर्वेटिव सांसदों के बीच सभी दौर के मतदान में अव्वल रहे लेकिन, दूसरी ओर लिज ट्रस ने भी गवर्निंग पार्टी के लगभग 200,000 सदस्यों का समर्थन हासिल किया है।

सुनक की राह में रोड़े
ऋषि सुनक हालांकि पीएम पद की रेस में चल रहे पांचों दौर के मतदान में सबसे आगे रहे। लेकिन, विपक्षी दल और बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को पसंद नहीं करते हैं। वरिष्ठ सांसद डेविड डेविस ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सुनक के चुनाव प्रचार दल के अभियान की जांच की मांग की है। दूसरी ओर बोरिस जॉनसन के करीबियों का मानना है कि बोरिस सरकार गिराने के पीछे सुनक का हाथ है। सुनक के इस्तीफे के बाद बोरिस जॉनसन कमजोर पड़ गए और उन्हें मजबूरी में सत्ता से बाहर होना पड़ा। 

सुनक के लिए नया खतरा
इससे पहले चौथे दौर के मतदान में सुनक को 118 सांसदों का समर्थन मिला था। लेकिन डेविस ने आरोप लगाया कि सुनक की टीम ने 19 जुलाई को नवीनतम दौर की वोटिंग में अपनी जीत को सुरक्षित करने के लिए विदेश सचिव और प्रतिद्वंद्वी लिज ट्रस के वोट को स्थानांतरित किया। यह आरोप इसलिए भी सुनक के विपरीत जाता है क्योंकि बुधवार को पांचवे दौर की वोटिंग में 27 सांसदों में से सिर्फ 19 ने सुनक के पक्ष में मतदान किया।

गुरुवार को ED कार्यालय में सोनिया गांधी से पूछताछ

  गुरुवार यानी 21 जुलाई को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए बुलाया है। ED ने नेशनल हेराल्ड मामले में पहले भी सोनिया गांधी को समन भेजा था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी ने अतिरिक्त समय मांगा। अब उनसे 21 जुलाई को पूछताछ होनी है। उधर कांग्रेस ने इस मामले में देश भर में विरोध-प्रदर्शन का फैसला किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कल AICC कार्यालय में एकत्र होंगे। इसमें पार्टी के सांसद भी शामिल होंगे और बाद में वे सभी ED कार्यालय तक जाएंगे। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से भी एकजुटता दिखाने का अनुरोध किया है। सोमवार को विपक्षी नेताओं की एक बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश ने अन्य दलों से 21 जुलाई को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया।


संसद में भी उठेगा मामला

अभी संसद का मानसून सत्र चल रहा है। ऐसे में पूरी संभावना है कि संसद में भी ये मामला उठेगा और विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा मिल जाएगा। कांग्रेस ने शुरु से ही इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है और उनका आरोप है कि बीजेपी सरकार ED का दुरुपयोग कर रही है। सोनिया गांधी से पहले राहुल गांधी भी ईडी की पूछताछ का सामना कर चुके हैं। राहुल गांधी से ईडी ने 30 घंटे से अधिक समय तक सवाल पूछे।

आवाम ने नफ़रत की राजनीति को नकारा-ओवैसी

  मध्य प्रदेश के निकाय चुनाव में पहली बार हिस्सा ले रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने प्रदेश में कदम जमाना शुरू कर दिया है। राज्य में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 7 पार्षद जीत चुके हैं। प्रदेश में मिली इस जीत को लेकर एआईएमआईएम के कार्यकर्त्ता जोश में हैं। वहीं इस जीत के बड़े मायने तलाशे जा रहे हैं। खंडवा, बुरहानपुर, जबलपुर  और खरगोन में मिली कामयाबी को लेकर ओवैसी भी बहुत खुश नजर आ रहे हैं। खासकर खरगोन में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत एक बड़े राजनीतक दांव के रूप में देखी जा रही हैं। 


अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर खुद ओवैसी ने भी ट्वीट कर लिखा कि अरुणा जी का हम शुक्रिया अदा करते हैं। उनकी जीत ने सही मायनों में खरगोन में सेक्युलरिज़्म और हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद की मिसाल क़ायम की है। बता दें कि राम नवमी पर निकाले जाने वाले जुलुस के दौरान खरगोन में हिंसा भड़क उठी थी। उसके बाद यहां माहौल में साम्प्रदायिकता का जहर घुलने लगा था। ऐसे में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत को सेक्युलरिज़्म से जोड़कर देखा जा रहा है। 

मध्य प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को मिली कामयाबी के बाद प्रदेश की सियासत में नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन की पार्टी ने राजनीति के नए विकल्प की राह को खोल दिया हैं।  AIMIM  की जीत के बाद माना जा रहा था की मुसलमानों को प्रदेश में नया नेतृत्व मिल गया हैं।


शिवराज जीतकर भी क्यों टेंशन में, पिछड़कर भी कांग्रेस की खुशी का राज

  मध्य प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और अब राजनीतिक दल नफा-नुकसान के आकलन में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जहां 9 शहरों नगर निगम में जीत हासिल हुई है तो कांग्रेस को 5 मेयर पद हासिल हुए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सिंगरौली में जीत हासिल करते हुए मजबूत दस्तक दी है। हालांकि, नगर पालिका और नगर परिषद में जरूर बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी कुछ वार्ड जीतकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया है। 


9 शहरों में जीतकर भी क्यों टेंशन में बीजेपी
नतीजों के बाद भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत अन्य नेता खुशी का इजहार कर रहे हैं और नगर पालिका-नगर परिषद का हवाला देते हुए इसे ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं। लेकिन सच यह है कि पार्टी रणनीतिकारों के लिए चुनाव परिणाम ने कई मायनों में चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, पिछले चुनाव में भाजपा ने सभी 16 नगर निगम में भगवा परचम लहराया था। इस लिहाज से पार्टी को 6 शहरों में मेयर का पद गंवाना पड़ा है। वहीं, कुछ सीटों पर मामूली अंतर से जीत मिली है। चिंता की बात यह भी है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। 

क्या है कांग्रेस की खुशी का राज
कांग्रेस पार्टी ने ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रीवा और मुरैना में जीत हासिल की है। 5 शहरों में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के नेता गदगद हैं। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि पिछली बार कांग्रेस एक भी निगम नहीं जीत पाई थी, बल्कि यह पहली बार है जब पार्टी ने 5 शहरों में मेयर का पद हासिल किया है। दरअसल, बीजेपी को शहरों की पार्टी समझा जाता है। पार्टी हमेशा से नगरीय इलाकों में मजबूत रही है और कांग्रेस पार्टी को ग्रामीण इलाकों में अधिक मजबूत माना जाता है। लेकिन इस बार बीजेपी को कई शहरों में झटका लगा है तो कांग्रेस ने उस क्षेत्रों में सेंधमारी की है, जिन्हें बीजेपी का गढ़ माना जाता है।

सिंधिया को गढ़ में पटखनी देने से खुश हैं कांग्रेस नेता
दो साल पहले कांग्रेस में बगावत करके मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में भी जीत मिलने से कांग्रेस बेहद उत्साहित है। पार्टी के कई नेता इसे सिंधिया से बदला बता रहे हैं। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी ट्विटर पर लिखा कि ग्वालियर में मिली जीत से ज्यादा खुशी उन्हें किसी चीज में नहीं हुई है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस हार के बाद सिंधिया पर जमकर निशाना साधा है। ग्वालियर में जहां कांग्रेस ने 57 साल बाद जीत हासिल की थी तो जबलपुर में करीब दो दशक बाद परचम लहराया है। 

सीधी से साफ हुई भाजपा, कांग्रेस को नहीं मिला जनता का साथ

  मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में सीधी नगर पालिका परिषद से 24 पार्षद सीटों के लिए बुधवार को मतगणना हुई। यहां की 24 सीटों में से 14 सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाते हुए शानदार वापसी की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी सिर्फ छह सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है। वहीं एक सीट पर आम आदमी पार्टी ने अपना कब्जा जमाया है और 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते हैं । 


कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की यह प्रतिष्ठा वाली सीट थी। यहां कांग्रेस ने शानदार वापसी कर नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाने के लिए एकतरफा जीत हासिल की है।

नगर पंचायत चुरहट में भी मिली जीत
नगर पंचायत चुरहट में कांग्रेस ने 15 सीटों में 10 सीटों पर सफलता हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर सिमट कर रह गई है, वहीं 2 सीटों पर निर्दलीयों ने अपना कब्जा जमाया है। आपको बता दें कि चुरहट विधानसभा क्षेत्र से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की प्रतिष्ठा दांव में लगी थी। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा के महामंत्री एवं चुरहट से विधायक शरतेंदु तिवारी भी अपनी इज्जत बचाने की कोशिश में जुटे थे।

सीधी जिले की एक नगर पालिका एवं तीन नगर पंचायत में आए चुनाव परिणाम में सीधी नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी ने शानदार वापसी करते हुए भारतीय जनता पार्टी से यह सीट छीन ली है। जबकि चुरहट नगर पंचायत में कांग्रेस पार्टी का ही नगर पंचायत अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। वहीं नगर पंचायत मझौली एवं रामपुर नैकिन में भारतीय जनता पार्टी अपना अध्यक्ष बनाने में सफल हो जाएगी। मझौली एवं रामपुर नैकिन में कांग्रेस पार्टी का नगर पंचायत अध्यक्ष था। दोनों सीट भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से छीन ली है।

खुशी कपूर के डेब्यू को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं जान्हवी,

  बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर की अपकमिंग फिल्म 'गुड लक जेरी' जल्द ही रिलीज होने वाली है। वहीं उन्होंने अपनी छोटी बहन खुशी के डेब्यू को लेकर बातें की। इसमें उन्होंने ट्रोलर्स को एक खास मैसेज दिया है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि 'अगर ट्रोलर्स उनकी बहन को ट्रोल करते हैं तो वे उन्हें नहीं छोड़ेंगी।' हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में जाह्नवी कपूर ने अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म 'द आर्चीज' को लेकर अपनी एक्साइटमेंट जाहिर की है। वे काफी खुश हैं कि खुशी जल्द ही अपना डेब्यू करने वाली है। खुशी कपूर जाह्नवी की छोटी बहन है। वे बोनी कपूर और दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी हैं। खुशी जल्दी ही जोया अख्तर की फिल्म 'द आर्चीज' के साथ अपनी शुरुआत करने जा रही हैं। खुशी की यह फिल्म 2023 में रिलीज होगी। खुशी के अलावा इस फिल्म में सुहाना खान और अगस्त्य नंदा भी हैं।

अपनी बहन के


लिए काफी एक्साइटेड हैं जाह्नवी

हाल ही में एक बातचीत में जाह्नवी कपूर से ये सवाल किया गया कि 'उन्हें अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म के बारे में कैसा लगा।' इसके जवाब में उन्होंने कहा कि 'मैं बहुत खुश और एक्साइटेड हूं। मैं एक बार उनके आउटडोर शूट में भी गई थी। उनकी एनर्जी इतनी पॉजिटिव थी कि मुझे लगता है कि वे ऐसा कुछ बना रहे हैं जो कि दिल से है। और वह कुछ ऐसा है कि लोग उसे काफी प्यार देने वाले हैं। ये किड्स काफी टैलेंटेड और मेहनती हैं। मैंने अपनी बहन को काफी मेहनत करते हुए देखा है। उसने सच में कड़ी मेहनत की है। उसने इसके लिए ऑडिशन भी दिया है। खुशी को ये चाहिए ही था। मैं उसके लिए बहुत खुश हूं और उम्मीद करती हूं कि यह अच्छा हो।'

जाह्नवी ने दिया ट्रोलर्स को खास मैसेज

जाह्नवी ने आगे कहा कि 'अगर ट्रोलर्स उनकी बहन खुशी को टारगेट करेंगे तो उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।' उन्होंने कहा कि 'अगर कोई खुशी के बारे में कुछ भी बुरा कहता है तो ये सभी ट्रोलर्स, मैं उनको छोड़ूंगी नहीं। मैं कसम खाती हूं। मुझे नफरत है इन सब से।' वहीं आगे जाह्नवी से पूछा कि 'क्या उन्होंने अपनी छोटी बहन को कोई सलाह या टिप्स शेयर किया है।' इसका जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि 'उसे टिप्स की जरूरत नहीं है। वह काफी समझदार है।' बता दें कि जाह्नवी की अगली फिल्म 'गुड लक जेरी' 29 जुलाई को रिलीज होने वाली है। यह 2018 में आई तमिल फिल्म 'कोलामावु कोकिला' की रीमेक है। इस फिल्म में नयनतारा और योगी बाबू ने एक्टिंग की थी। कुछ हफ्तों पहले ही जाह्नवी की इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था।


13 सितंबर से होगा विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र

 मध्य प्रदेश विधानसभा का 25 जुलाई से प्रस्तावित पांच दिवसीय सत्र अब 13 सितंबर से होगा। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने सरकार के सत्र की तारीख में परिवर्तन के प्रस्ताव को अनुमति दे दी है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने पुनरीक्षित अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी। सत्र पांच दिवसीय ही रहेगा। इस बार शनिवार को भी सदन की कार्यवाही होगी।


विधानसभा के प्रमुख सचिव ने बताया कि सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने मानसून सत्र की तारीख पुनरीक्षित करने करने की अनुमति दी है। अब सत्र 13 से 17 सितंबर तक होगा। इस दौरान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रथम अनुपूरक अनुमान (बजट) प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग सभी विभागों से प्रस्ताव मांग चुका है। इसके अलावा नगर पालिक विधि द्वितीय संशोधन, भू-राजस्व संहिता में संशोधन सहित अन्य विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे।

सत्र की तारीख में परिवर्तन पर सभी थे सहमत

विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख में परिवर्तन भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की सहमति के बाद किया गया है। दरअसल, इस बार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के माध्यम से किया जाना है। इसके लिए कलेक्टर निर्वाचित पार्षदों का सम्मेलन बुलाएंगे। इसी तरह जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव होना है। इस प्रक्रिया में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम और प्रमुख सचिव 22 अगस्त से कनाडा में होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके लिए वे 20 अगस्त को जाएंगे और सितंबर के प्रथम सप्ताह में लौटेंगे। इसे देखते हुए सत्र सितंबर में प्रस्तावित किया गया है।

57 साल बाद भी नहीं टूटा मिथक, सिंधिया परविार नहीं बना सका अपनी मर्जी का मेयर

  नगर निगम ग्वालियर न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में बीजेपी के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी की ताकत दिखाने का पांच दशक तक उदाहरण देने का काम करता था। 57 वर्ष पूर्व जब इस निगम में जनसंघ काबिज हुई थी तब देश मे यह चौंकाने वाली बात थी क्योंकि तब तक देश मे कांग्रेस इकलौती सियासी ब्राण्ड थी और जनसंघ बमुश्किल दो-चार पार्षदों को ही जिता पाती थी। लेकिन एक बार जनसंघ जीती इसके बाद फिर कांग्रेस इस पर काबिज नहीं हो पाई। मिथक बन गया कि जिस दल की कमान सिंधिया परिवार के पास रहती है, नगर निगम में उसका मेयर नहीं बन पाता।


इस बार इस मिथक के टूटने की संभावना थी क्योंकि इस नगर निगम पर बीजेपी का साढ़े पांच दशक से भी ज्यादा पुराना कब्जा था और कांग्रेस उसे हराना तो दूर उसे कभी चुनौती भी नही दे पाती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस सिंधिया मुक्त हुई तो उसने चमत्कार करते हुए नगर निगम ग्वालियर को बीजेपी मुक्त कर दिया लेकिन सिंधिया परिवार से जुड़ा मिथक नहीं टूटा।

ग्वालियर के ऐतिहासिक नगर निगम की सत्ता पर पूरे सत्तावन साल से भाजपा कब्जा जमाये हुए बैठी थी। लेकिन इस बार का चुनाव ख़ास था। इसकी बजह है सिंधिया परिवार। सत्तर के दशक से अंचल की सियासत पर सिंधिया परिवार का कब्ज़ा रहा है। ख़ास बात ये कि सिंधिया परिवार कांग्रेस में टिकट बांटता रहा है लेकिन अभी तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि सिंधिया परिवार अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने सड़क पर उतरा हो।

लेकिन इस बार सब कुछ उलट - पुलट हुआ। सिंधिया इस बार कांग्रेस में नहीं बल्कि उसी बीजेपी में हैं जिसके खिलाफ वे लगातार अपने प्रत्याशी लड़ाते थे। सिंधिया परिवार ने पहली बार अपनी परंपरा को तोड़ते हुए नगर निगम मेयर और पार्षद प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया,रोड शो किया और वोट मांगे। बावजूद यहां से पहली दफा कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती शोभा सिकरवार ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।

महारानी ने ली थी कांग्रेस की सदस्यता 

स्वतंत्रता  के बाद से ही सिंधिया परिवार का कांग्रेस में प्रवेश हो गया था। 1947 में देश आज़ाद हुआ और ग्वालियर रियासत का भारत सरकार में विलय हो गया। तत्कालीन महाराज जियाजी राव सिंधिया को भारत सरकार ने ब्रिटिश परम्परा की तरह उनको नव गठित मध्यभारत प्रान्त का राज्य प्रमुख बनाया था और उन्होंने ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई थी। राजतन्त्र समाप्त होने के बाद तत्कालीन महाराजा सिंधिया ने तो राजनीति में नहीं जाने का फैसला किया था लेकिन उनकी पत्नी महारानी विजयाराजे सिंधिया ने उप प्रधानमंत्री बल्लभ भाई पटेल के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ली थी। 

इसके बाद वे सांसद और विधायक रहीं लेकिन 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्रा से उनका विवाद हो गया और उन्होंने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और जनसंघ में शामिल हो गईं। इस तरह राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और इंदिरा गांधी के सलाहकार पंडित डीपी मिश्र की सरकार का पतन हो गया। राजमाता के विधायकों के सहयोग से जनसंघ ने संभवत: देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार का गठन किया। जिसे इतिहास में संबिद सरकार के नाम से जाना जाता है। इस घटनाक्रम के समय राजमाता के इकलौते पुत्र माधव राव सिंधिया लन्दन में रहकर पढ़ाई कर रहे थे।

वे 1970 में  लौटे और कुछ महीनो बाद 25 वीं वर्षगांठ मनाई गई। राजमाता ने उन्हें अपनी परम्परागत गुना संसदीय सीट गिफ्ट की और उन्हें वहां से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ाया और जीत हासिल की। लेकिन युवा माधवराव को जनसंघ के विचार और तौर-तरीके पसंद नहीं आये और राजमाता से भी अलगाव होने लगा।  इस बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी। राजमाता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और उनके पुत्र माधव राव नेपाल चले गए जहां उनकी बड़ी बहन उषा राजे भी रहती थी और स्वयं माधव राव का वहां ससुराल भी था। 

इसी दौरान माधव राव और इंदिरा गांधी के बीच नजदीकी बढ़ी। इमरजेंसी हटने के बाद आम चुनाव हुए तो माधव राव ने जनसंघ से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। वे निर्दलीय मैदान में उतरे और कांग्रेस ने इनके खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। देश भर में चल रही कांग्रेस विरोधी लहर में पूरे उत्तर भारत से कांग्रेस साफ़ हो गई। स्वयं पीएम इंदिरा गांधी भी चुनाव नहीं जीत सकीं। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस का बुरा हाल हो गया। हालांकि फिर भी यहां दो लोकसभा सीटें जीती थी। एक छिंदबाड़ा और दूसरी गुना। छिंदवाड़ा  से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गार्गी शंकर मिश्रा जीत गए और गुना से माधवराव जीते। 

मेयर के टिकट का फैसला सिंधिया करते लेकिन जनता हरा देती 

इस जीत के साथ ही देश भर की निगाहें इस युवा सांसद पर गईं। जीत के कुछ साल बाद ही वे कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल हो गए। तब से वे अंतिम साँस तक कांग्रेस में रहे। हालाँकि हवाला मामले में नाम आने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए कांग्रेस छोड़ी और तमाम दलों से ऑफर मिलने के बावजूद वे किसी दल में शामिल नहीं हुए और ग्वालियर सीट से अपनी मप्र विकास कांग्रेस से चुनाव लड़े और शानदार जीत हासिल की। अपने अंतिम समय तक ग्वालियर नगर निगम में मेयर से लेकर पार्षद तक के टिकट का फैसला वे ही करते थे लेकिन वे कभी किसी मेयर या पार्षद प्रत्याशी का प्रचार करने नहीं गए।

उनके असामयिक निधन के बाद उनके युवा बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार की राजनीतिक विरासत संभाली। कांग्रेस के सभी निर्णय सूत्र पिता की तरह उनके हाथ में ही रहे लेकिन उन्होंने भी अपने आप को समर्थकों को सिर्फ टिकट देने तक सीमित रखा। प्रचार करके जिताने वे कभी सड़कों पर नहीं आये। यह भी सच है कि कांग्रेस में रहते कभी भी यहां काँग्रेस का मेयर नहीं बन सका।

मंदसौर में BJP को मिली एक तरफा जीत

  मध्य प्रदेश में रविवार को आए नगर निकाय के प्रथम चरण के नतीजों में भाजपा ने कुछ जगहों पर अपना परचम लहराया है, तो वहीं कई जगह पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। प्रदेश में भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मालवा क्षेत्र में भाजपा ने अपनी जीत कुछ क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से दर्ज करवाई है, जबकि कांग्रेस यहां संतुलित आंकड़ों में ही बढ़ता बना पाई है।

बीजेपी और कांग्रेस में सबसे अधिक कांटे की टक्कर नीमच नगर पालिका के नतीजों में देखने को मिल रही है। वहीं, मंदसौर में भाजपा ने वर्षों का रिकॉर्ड तोड दिया है। यहां पहले से ही 40 वर्षों से नगर पालिका पर कब्जा कर बैठी भाजपा ने इस बार फिर कांग्रेस को जबर्दस्त पटखनी दी है। वहीं, रतलाम की ताल नगर परिषद की 15 सीट में से 6 सीटों पर निर्दलियों की जीत ने दोनों पार्टियों के कान खड़े कर दिए हैं। 

मंदसौर में इस स्थिति में कभी नहीं दिखी कांग्रेस, सांसद के वार्ड से हार गई भाजपा

मंदसौर नगर पालिका के 40 वार्डों में से 29 सीट पर भाजपा पार्षदों ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस मात्र 8 सीटों पर ही कब्जा कर पाई है। इसके अलावा 3 वार्ड निर्दलियों के खाते में गए हैं, जिनमें से दो वार्ड भाजपा के पुश्तैनी माने जाते थे। भाजपा की सीटें जरूर ज्यादा आई हैं, लेकिन बीजेपी अपने सांसद सुधीर गुप्ता के वार्ड क्रमांक 7 से ही 683 मतों से हार गई है। बड़ी बात यह भी है कि मंदसौर नगर पालिका में वर्तमान में कांग्रेस की जितनी सीटें आई हैं, उतनी दयनीय स्थिति में कांग्रेस यहां कभी नहीं दिखी। इसके अलावा ग्राम नगरी नगर परिषद में भी भाजपा ने 15 में से 10 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 4 और 1 वार्ड निर्दलीय के खाते में गया है।


रतलाम के ताल नगर परिषद में निर्दलियों ने बिगाड़ा दोनों पार्टियों का समीकरण

प्रथम चरण की मतगणना में रतलाम जिले की ताल और आलोट नगर परिषदों के भी नतीजे सामने आए हैं, जिसमें आलोट नगर परिषद की 15 सीटों में से 9 पर बीजेपी, 4 पर कांग्रेस और 2 पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि ताल नगर परिषद में तो निर्दलियों ने अपना डंका बजाया है। यहां 6 निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि 5 पर कांग्रेस और मात्र 4 वार्डों में ही बीजेपी उम्मीदवार जीत दर्ज कर पाए हैं। ऐसे में स्थिति साफ है कि यहां का अध्यक्ष निर्दलीय उम्मीदवार ही तय करेंगे।

नीमच की नगर पालिका में कांग्रेस आगे, एक परिषद पर भाजपा का कब्जा

नीमच में भी नगर पालिका नीमच और जीरन नगर परिषद के कुल 55 वार्डों की मतगणना में जीरन के 15 वार्डों के नतीजे आ चुके हैं। यहां जीरन नगर परिषद के 15 वार्डों में से 6 पर बीजेपी, 5 पर कांग्रेस और 4 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जबकि अब तक सामने आए नीमच नगर पालिका के 40 में से 10 वार्डों के नतीजे में कांग्रेस के 5, बीजेपी के 3 और निर्दलीय 2 उम्मीदवार जीते हैं। मतगणना धीमी गति से चलने के कारण यहां अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन हालिया स्थिति को देखते हुए यहां बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।


भोपाल नगर निगम में 25% प्रत्याशियों को 1000 से कम वोटों के अंतर से मिली जीत

 भोपाल नगर निगम (बीएमसी) के वार्ड पार्षदों के चुनाव में एक चौथाई विजेताओं के लिए जीत का अंतर 1,000 से कम वोटों का रहा। बीएमसी में 85 वार्ड हैं। रविवार को घोषित परिणामों में करीबी मुकाबलों में बीजेपी ने कांग्रेस को 3:1 से पीछे कर दिया।


भाजपा ने 13 सीटों पर 1000 से कम वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने सात सीटों 1000 से कम वोटों के अंतर से जीती। खास बात यह रही कि बीएमसी की 42 सीटों पर जीत का अंतर 2000 वोटों से कम रहा। 2000 से कम वोटों के अंतर से जीत की बात करें तो भाजपा ने 42 में से 30 पर, कांग्रेस ने 10 पर और निर्दलीय प्रत्याशियों ने दो पर जीत हासिल की।

10% विजेताओं ने 500 से कम वोटों के अंतर से लहराया जीत का परचम
वार्ड नंबर 4 में भाजपा के राजेश हिंगोरानी ने 25 मतों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। जानकारों के मुताबिक गांधीनगर और बैरागढ़ भाजपा के गढ़ माने जाते हैं। इन जगहों पर भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही, जिसे देखते हुए अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नेता अब चिंतित हैं। वॉर्ड नंबर 33 में अमित शर्मा जैसे बड़े नेता का भाजपा के आर के सिंह से 783 वोटों से हारना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। वार्ड 79 से अंजू राजपूत और वार्ड 9 से नाहिद खान ने क्रमशः 6,070 और 6,017 मतों के सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की।


'असली टाइगर तो यहां बैठा है' - CM शिवराज

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को भोपाल में चाय पर चर्चा की। चाय पर चर्चा कार्यक्रम में कई लोग मौजूद थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को कई सख्त आदेश भी दिये हैं। मंच पर अपने अंदाज में मुख्यमंत्री ने गुंडे-बदमाशों को चेताया है और पुलिस को कहा है कि जल्द से जल्द वो इनपर कार्रवाई करें। 


भोपाल में आय़ोजित इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान जब मंच पर आए तो उन्होंने मंच पर लगे कूलर को बंदा करा दिये। सीएम ने कहा कि कूलर बंद करो, जनता कूलर के बिना बैठी है तो मुख्यमंत्री भी बिना कूलर के बोलेगा...।

इसके बाद सीएम ने मंच से ही पूछा कि यहां पुलिसवाले कौन हैं। कार्यक्रम के दौरान किसी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके इलाके में टाइगर नाम के किसी गुंडे का आतंक बढ़ रहा है। इसके बाद तो सीएम ने मंच से पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि वो जल्द से जल्द इसपर कार्रवाई करें। 

सीएम ने कहा, मुझे बताया गया है कि यहां की जनता गुंडे-बदमाशों से परेशान है। यहां परमानेंट चौकी बनाएं और डंडा लेकर निकल पड़ो, सही कर दो..., मैं निर्देश दे रहा हूं... आगे कोई शिकायत आई तो फिर..! यह जरा देख लें, कौन है- टाइगर-फाइगर। असली टाइगर तो यहां बैठा है ...तो काहे के टाइगर-फाइगर?' सीएम ने मंच से कहा कि पूरे राज्य के गुंडे-बदमाशों के लिए यह चेतावनी है। 

इसके बाद सीएम शिवराज ने ऐलान किया कि जनता के पीने के पानी की समस्या दूर होगी। उन्होंने मंच से ही कलेक्टर को निर्देश दिए कि यहां ओवरहेड टैंक बनाकर घरों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा टेंडर के चक्कर में देरी नहीं होना चाहिए। 

सीएम ने कू पर लिखा, 'भाजपा का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना और जीतना नहीं है, जनता की जिंदगी बदलना है। आज से ही हमने नये सिरे से जनता की जिंदगी को बदलने का अभियान प्रारंभ किया है। यहां लोगों ने जो समस्याएं बताई है, उसके तत्काल समाधान के निर्देश दिये हैं। जनता की जिंदगी बदलना है, चेहरे पर मुस्कुराहट लाना है। इसलिए रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई, लिखाई, दवाई, रोजगार का अभियान हम नये सिरे से प्रारंभ कर रहे हैं।' 


सुप्रीम कोर्ट में नूपुर शर्मा ने फिर दायर की याचिका

 बीजेपी से निलंबित नेता नूपुर शर्मा ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी मामले में अपने ऊपर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) दिल्ली ट्रांसफर करने का अनुरोध किया है। नुपूर शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद उनकी जान को खतरा और अधिक बढ़ गया है। उन्हें रेप और हत्या की धमकी मिल रही है। इनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।


पिछली बार नूपुर शर्मा की इसी याचिका को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था। जस्टिस जेबी पारदीवाला जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अपने बयान को लेकर उन्हें टीवी पर जाना चाहिए था और पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए थी। शीर्ष अदालत ने कहा था, "जिस तरह से नूपुर ने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।"

नूपुर शर्मा ने एक टीवी डिबेट शो में पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। इसे लेकर उनके खिलाफ कई राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई। कोलकाता पुलिस की तरफ से उन्हें कई बार समन भी जारी हो चुका है और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।


मध्‍य प्रदेश के कांग्रेस विधायक सचिन बिरला ने की क्रास वोटिंग

राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में मध्य प्रदेश में एक कांग्रेस विधायक ने क्रास वोटिंग की। बड़वाह से विधायक सचिन बिरला ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा में हूं। हम सबके लिए यह ऐतिहासिक क्षण था। देश के सबसे गरीब वर्ग को मौका मिला है। बिरला खंडवा लोकसभा उपचुनाव के समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा में दो बार आवेदन कर चुकी है। हालांकि, दोनों बार विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम आवेदन निरस्त कर चुके हैं, इसलिए वे तकनीकी आधार पर कांग्रेस विधायक दल के ही सदस्य माने जाते हैं।


राष्ट्रपति चुनाव के लिए सुबह दस बजे से विधानसभा भवन स्थित समिति कक्ष में बनाए गए मतदान केंद्र पर मतदान प्रारंभ हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे पहले मतदान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष डा. गोविन्द सिंह सहित अन्य विधायकों ने मतदान किया। दलीय स्थिति के अनुसार मध्य प्रदेश में भाजपा के 127, कांग्रेस के 96, बसपा दो, सपा एक और चार निर्दलीय विधायक है।

 सपा के राजेश्ा शुक्ला और निर्दलीय विक्रम सिंह राणा पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बसपा के एक अन्य विधायक रामबाई शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में मौजूद थीं। वहीं, सचिन बिरला ने राजग प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया है। वे कांग्रेस विधायकों से भी मिलने नहीं पहुंचे और न ही विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेते हैं। संसदीय कार्य मंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू को मध्य प्रदेश से भरपूर समर्थन प्राप्त होगा। निर्धारित मतों से कुछ अधिक मत राजग प्रत्याशी को मिलेंगे। वहीं, पूर्व मंत्री बाला बच्चन ने बताया कि हमारे दल के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी लाइन के अनुसार ही मतदान हुआ है।

हार्दिक पांड्या ने एक बार फिर बनाई अपनी अलग पहचान

 भारत के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या अपने करियर के सबसे सुनहरे फॉर्म से गुजर रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में उन्होंने अपने हरफनमौला प्रदर्शन से भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। गेंद से उन्होंने पहले 4 विकेट झटके और फिर 55 गेंदों में 71 रन की पारी खेली। बल्लेबाजी के दौरान उन्होंने ऋषभ पंत के साथ पांचवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी भी निभाई। 


इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे हार्दिक पांड्या ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दिखाया है कि किस तरह उनके चोटिल कमर का ऑपरेशन होने के बाद उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर वापसी की और इस दौरान जिन लोगों ने उनका साथ दिया। उनका इस ऑलराउंडर ने धन्यवाद दिया है। 

हार्दिक पांड्या ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन दिया, "उतार-चढ़ाव के दौरान, मेरे लोगों जो मेरे साथ रहे। हर सुबह उठकर जाने का जुनून, मजबूत बनने की इच्छा के साथ और फिट होकर देश के लिए लिए खेलना। हमेशा मेरे साथ खड़े रहने वालों के लिए आभारी, जिन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया, जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया।''

2019 में कमर के ऑपरेशन के बाद हार्दिक पांड्या का फॉर्म ज्यादा अच्छा नहीं रहा था और वह अपना सौ प्रतिशत गेम को नहीं दे पा रहे थे। वह इस दौरान चोट से जूझ रहे थे और इसका असर उनकी गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी पर भी पड़ रहा था। 2021 में हुए टी20 वर्ल्ड कप में हार्दिक को बतौर स्पेशलिस्ट बल्लेबाज टीम में जगह दी गई थी। लेकिन वहां भी वह कुछ कमाल नहीं कर सके और एक समय ऐसा लग रहा था कि ये स्टार ऑलराउंडर शायद ही भारतीय टीम में वापसी कर पाएगा।

सुष्मिता सेन गोल्ड डिगर नहीं वो लव डिगर है - विक्रम भट्ट

 बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की खबरें आ रही हैं। दोनों की रोमांटिक फोटोज वायरल होने के बाद चर्चांओं का सिलसिला तेज हो गया था। दोनों के रिश्ते को लेकर जब तरह-तरह की खबरें आने लगीं तो पहले सुष्मिता सेन और फिर ललित मोदी ने इस रिश्ते को लेकर चुप्पी तोड़ी। अब सुष्मिता सेन के एक्स बॉयफ्रेंड विक्रम भट्ट ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है।


गोल्ड डिगर नहीं लव डिगर हैं सुष्मिता सेन
इंडिया टुडे के साथ बातचीत में विक्रम भट्ट ने उन सभी लोगों को लताड़ लगाई है जो एक्ट्रेस को गोल्ड डिगर कह रहे हैं। विक्रम भट्ट ने ट्रोल्स को लताड़ते हुए कहा कि किसी को प्यार करने से पहले उसका बैंक बैलेंस चेक करने वालों की लिस्ट में शायद सुष्मिता सेन आखिरी शख्स होंगी। विक्रम भट्ट ने सुष्मिता सेन को गोल्ड डिगर नहीं बल्कि लव डिगर कहा।

विक्रम भट्ट ने याद किया सुष्मिता के साथ वाला 
मालूम हो कि सुष्मिता सेन और विक्रम भट्ट के एक दूसरे को डेट करने की खबरें एक वक्त पर काफी चर्चा में रही थीं। दोनों की नजदीकियों के बारे में एक वक्त पर काफी चर्चाएं रह चुकी हैं। विक्रम भट्ट ने अपना अतीत याद करते हुए कहा कि उस वक्त मेरे पास कोई पैसे नहीं थे। मैं गुलाम मूवी डायरेक्ट कर रहा था और तब वह मुझे US लेकर गई थीं। विक्रम ने बताया कि सुष्मिता पहली शख्स थीं जो उन्हें अमेरिका लेकर गईं और सारा खर्च उठाया।

'किसी का मजाक बनाना अब एंटरटेनमेंट है'
विक्रम भट्ट ने बताया कि जब वह अमेरिका पहुंचे तो वहां एक लिमोजीन कार खड़ी थी जो सुष्मिता ने उनके लिए मंगवाई थी। सुष्मिता विक्रम भट्ट की अमेरिका में एंट्री खास बनाना चाहती थीं। सुष्मिता सेन को ट्रोल कर रहे लोगों पर गुस्सा करते हुए विक्रम भट्ट ने कहा कि लोगों के लिए किसी की जिंदगी का मजाक बनाना एंटरटेनमेंट हो गया है। जब किसी की जिंदगी में ट्रैजिडी होती है तो लोगों के लिए ये एंटरटेनमेंट होता है।

कैसा था सुष्मिता सेन और विक्रम भट्ट का रिश्ता?
जहां तक सुष्मिता सेन और विक्रम भट्ट के रिश्ते की बात है तो उन्होंने बताया कि वह साल 2006-2007 में आखिरी बार एक दूसरे से मिले थे। पिछले 15 साल से दोनों एक दूसरे के संपर्क में नहीं हैं। विक्रम ने कहा कि उनकी सुष्मिता से बातचीत नहीं है लेकिन फिर भी वह हमेशा उनके प्रति आभार महसूस करते हैं और कहा कि वह कभी भी गोल्ड डिगर महिला नहीं हो सकती हैं और वह हमेशा उनके लिए खड़े रहेंगे।

मेरे जवानों के पास ऐसे हथियार होंगे जिनके बारे में विरोधी सोच भी नहीं सकते: पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत में एक नया रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है जहां आयात कम किया जा रहा है और निर्यात बढ़ रहा है। भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित NIIO (नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन) संगोष्ठी 'स्वावलंबन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य, 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत जरूरी है। आत्मनिर्भर नौसेना के लिए पहले स्वावलंबन सेमिनार का आयोजन होना, इस दिशा में अहम कदम है।


नौसैनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, मोदी ने कहा, “हमने सरलतम उत्पादों के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहने की आदत सी डाल ली है। नशा करने वालों की तरह हम भी विदेशों से उत्पाद मंगाने के आदी थे। इस मानसिकता को बदलने के लिए 'सबका प्रयास' की मदद से रक्षा का एक नया पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए हमने 2014 के बाद एक मिशन मोड पर काम किया।" उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि हमारे पास टैलेंट नहीं। हमारे पास टैलेंट है। मेरे सैनिकों को उन्हीं 10 हथियारों के साथ मैदान में जाने देना जो दुनिया के पास हैं... मैं ऐसा जोखिम नहीं उठा सकता। मेरे जवान के पास वो हथियार होगा जो विरोधी सोच भी नहीं पाएगा।"

पीएम मोदी ने भारत के आत्मविश्वास और उसकी आत्मनिर्भरता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ युद्ध तेज करने का आह्वान करते हुए सोमवार को कहा कि ऐसी हर कोशिश को नाकाम करना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक मंच पर खुद को स्थापित कर रहा है, वैसे-वैसे दुष्प्रचार के माध्यम से लगातार हमले हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘खुद पर भरोसा रखते हुए भारत के हितों को हानि पहुंचाने वाली ताकतें चाहे देश में हों या फिर विदेश में, उनकी हर कोशिश को नाकाम करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश की रक्षा के लिए हमें एक और अहम पक्ष पर ध्यान देना चाहिए। हमें भारत के आत्मविश्वास को, हमारी आत्मनिर्भरता को चुनौती देने वाले ताकतों के विरुद्ध युद्ध तेज करना है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की रक्षा अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुत व्यापक है इसलिए हर नागरिक को इसके लिए जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे आत्मनिर्भर भारत के लिए ‘होल ऑफ द गवर्नमेंट एप्रोच’ के साथ आगे बढ़ रहे हैं वैसे ही राष्ट्र रक्षा के लिए भी ‘होल ऑफ द नेशन अप्रोच’ समय की मांग है। भारत के कोटि-कोटि जनों की की यही सामूहिक राष्ट्र चेतना ही सुरक्षा और समृद्धि का सशक्त आधार है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे भी व्यापक हो गए हैं और युद्ध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ भूमि, समुद्र और आकाश तक ही रक्षा की कल्पना की जाती थी लेकिन अब इसका दायरा अंतरिक्ष, साइबर स्पेस और आर्थिक व सामाजिक स्पेस की तरफ बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 8 वर्षों में केंद्र की सरकार ने सिर्फ रक्षा का बजट ही नहीं बढ़ाया है बल्कि ये बजट देश में ही रक्षा निर्माण इकोसिस्टम के विकास में भी काम आए, यह भी सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए तय बजट का बहुत बड़ा हिस्सा आज भारतीय कंपनियों से खरीद में ही लग रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘बीते चार-पांच सालों में हमारा रक्षा आयात लगभग 21 प्रतिशत कम हुआ है। आज हम सबसे बड़े रक्षा आयातक के बजाय एक बड़े निर्यातक की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारतीय उद्योग और शिक्षा जगत को जोड़ना है।

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